Azadi ka Amrit Mahatsav

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राष्ट्र निर्माण के सफर में मील के पत्थर :

16-09-1935 को पंजीकृत

21-10-1935 को जारी सूचीपत्र में लिखित प्रतिबध्दताएँ:

“उच्च स्तर की सुरक्षा तथा कार्यक्षमता के साथ व्यापार, वाणिज्य और उद्योगों के लिए सहायता करने की कोशिश करते समय; पूरे महाराष्ट्र में अपने व्यावसायिक परिचालनों को लगातार फैलाना और अवसर उपलब्ध होते ही, उससे बाहर के क्षेत्र में भी सामान्यजन को विभिन्न सेवाएँ मुहैया कराना”

1936 : पुणे में 08/02/1936 को परिचालन प्रारंभ।

1938 : बैंक की दूसरी शाखा फोर्ट, मुम्बई में खोली गई।

1940 : तीसरी शाखा डेक्कन जिमखाना, पुणे में शुरू हुई।

1944 : अनुसूचित बैंक का दर्ज़ा प्राप्त हुआ।

1946 : जमाराशियों ने रु.एक करोड़ की सीमा पार की। संपूर्ण स्वामित्व की एक सहायक कंपनी ‘दि महाराष्ट्र एक्जिक्यूटर एण्ड ट्रस्टी कंपनी’ गठित की। महाराष्ट्र से बाहर पहली शाखा हुबळी (मैसूर राज्य, अब कर्नाटक) में खोली गई।

1949 : आंध्र प्रदेश में विस्तार : हैदराबाद शाखा खोली गई।

1963 : गोवा में विस्तार : पणजी शाखा खोली गई।

1966 : मध्य प्रदेश में विस्तार : इन्दौर शाखा खोली गई। गुजरात में प्रवेश : वडोदरा शाखा खोली गई।

1969 : अन्य 13 बैंकों के साथ राष्ट्रीयकरण। 19-12-69 को करोलबाग शाखा खोलकर दिल्ली में प्रवेश किया गया।

1974 : जमाराशियां रु. 100 करोड़ के लक्ष्य के पार हुई।

1976 : पहला क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ‘मराठवाडा ग्रामीण बैंक’ 26-08-1976 को स्थापित किया गया।

1978 : नए प्रधान कार्यालय भवन का उदघाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई द्वारा किया गया। जमाराशियां ने रु.500 करोड़ के आंकड़े के पार हुई।

1979 : अनुसंधान तथा व्यापक कार्य करने एवं किसानों को अधिक गहन सेवाएँ प्रदान करने के लिए “महाराष्ट्र कृषि अनुसंधान और ग्रामीण विकास प्रतिष्ठान” नामक पंजीकृत सार्वजनिक न्यास स्थापित किया गया।

1985 : महाराष्ट्र राज्य की 500 वीं शाखा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी के हाथों नरीमन पाइंट, मुम्बई में खोली गई। शाखा में पहली एडवान्स लेजर पोस्टिंग मशीन(ए.एल.पी.एम.) स्थापित की गई। डॉ.मनमोहन सिंह गर्वनर, भारतीय रिज़र्व बैंक के करकमलों से स्वर्ण जयंती समारोह का आरंभ किया गया।

1986 : ठाणे ग्रामीण बैंक का प्रायोजन किया गया।

1987 : पुणे में बैंक की 1000वीं शाखा इन्दिरा वसाहत, बिबवेवाडी में भारत के माननीय उप राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा के करकमलों से आरंभ की गई।

1991 : ‘महाबैंक किसान क्रेडिट कार्ड’ आरंभ किया गया। इसके द्वारा घरेलू क्रेडिट कार्ड व्यवसाय में प्रवेश किया गया। मेन फ्रेम कम्प्यूटर स्थापित किया गया। एसडब्ल्यूआईएफटी (स्विफ्ट) का सदस्य बन गया।

1995 : हीरक जयन्ती समारोह के अवसर पर भारतीय रिज़र्व बैंक के गर्वनर डॉ.सी.रंगराजन प्रमुख अतिथि थे। जमाराशियों ने रु.5000 करोड़ का लक्ष्य पार किया ।

1996 : पहले की ‘सी’ श्रेणी से ‘ए’ श्रेणी में दाखिल हुआ। स्वायत्तता प्राप्त की गई।

2000 : जमाराशियों ने रु.10,000 करोड़ का लक्ष्य पार किया।

2004 : शेयर्स का सार्वजनिक निर्गम – जनसामान्य द्वारा 24 % धारित, बी.एस.ई.और एन.एस.ई. में सूचीबध्द।

2005 : बैंक एश्योरेन्स और मुच्युअल फंड वितरण व्यवसाय शुरू किया गया।

2006 : कुल व्यवसाय का स्तर रु. 50,000 करोड़ के पार हुआ। शाखा सी.बी.एस. परियोजना प्रारंभ की गई।

2009 : राष्ट्र की समर्पित सेवा के 75 वें वर्ष में प्रवेश किया। एकीकृत सर्वांगीण विकास के लिए 75 अल्प विकसित गावों को अपनाया गया।

2010 : 100 प्रतिशत सी.बी.एस.शाखाओं का लक्ष्य प्राप्त किया गया। कुल व्यवसाय ने रु.एक लाख करोड़ का लक्ष्य पार किया. प्लैटिनम वर्ष में 76 शाखाएँ खोलीं जिससे कुल शाखा संख्या 1506 हो गई। तत्कालीन वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी के हाथों प्लैटिनम जुबली वर्ष समापन समारोह का विज्ञान भवन, नई दिल्ली में शुभारंभ। महाचेतना, पुणे, मुंबई और दिल्ली में ई-लाउंज खोले, माइक्रो एसेट वसूली कक्ष के कार्यान्वयन जैसी नई पहलें की गईं।

2011 : पुणे में पहली एसएचजी शाखा खोली गई। बैंक द्वारा प्रायोजित महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक ने 77 दिनों में 100% सीबीएस का लक्ष्य प्राप्त किया। बैंक की स्थापना की 77वीं वर्षगांठ के समारोह में माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी के कर-कमलों से अवसर पर 5 मिड कॉर्पोरेट शाखाओं का शुभारंभ और स्व-सहायता समूहों के लिए 5 विशेषीकृत शाखाएं समर्पित।।

केन्द्रीय वित्त मंत्री की बैंक के प्रधान कार्यालय को पहली भेंट – माननीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी ने पुणे में बैंक में प्रधान कार्यालय, लोकमंगल को 07.12.2011 को भेंट दी। 2012: माननीय केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री पीचिदंबरम ने 25.08.2012 को राजगंभीरम में बैंक की 1624वीं शाखा का शुभारंभ किया। बैंक का कुल व्यवसाय रु.1,50,000 करोड़ के पार हुआ और यह रु.1,51,320 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र को द संडे स्टैंडर्ड द्वारा 2012 के लिए “बेस्ट बैंकर-कस्टमर फ्रेंडलीनेस” अवार्ड प्रदान किया गया। आस्ति गुणवत्ता श्रेणी के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक के रूप में डन एंड ब्रैड स्ट्रीट- पोलारिस फाइनांशियल टेक्नॉलॉजी बैंकिंग अवार्ड 2012 प्राप्त हुआ। बैंक ने 24-25 नवंबर 2012 को पुणे में बैंकॉन – 2012 की मेज़बानी की। माननीय केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री पी. चिदंबरम ने सम्मेलन का उद्घाटन किया।

2013 : श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा दिल्ली में रुपे कार्ड का आरंभ, 15 अगस्त 2013 को 50 शाखाएं खोली गईं। कुल व्यवसाय रु. 2.00 लाख करोड़ के पार हुआ।

2014 :; एक ही वर्ष में सबसे अधिक संख्या में 162 नई शाखाएं खोलते हुए शाखा नेटवर्क 1890 शाखाओं का हुआ। 1129 एटीएम की स्थापना करते हुए इनकी कुल संख्या 1827 हो गई। बैंक का अपना ईएफटी स्विच लागू किया गया।

2015 : 26 नई शाखाएं खोली गई जिससे शाखा नेटवर्क 1898 पर पहुंच गया। “महामोबाईल”- मोबाईल बैंकिंग एप्लिकेशन का आरंभ। बैंक के डाटा सेंटर, डीआर केंद्र, पीएमओ और प्रधान कार्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के लिए आईएसओ 27001:2013 प्रमाणन प्राप्त।

2016 : बैंक ने रु.2.50 लाख करोड़ का व्यवसाय स्तर पार किया। इंटरनेट बैंकिंग के लिए एड ऑन एप्लिकेशन “महासिक्योर” का कार्यान्वयन, इसके कारण कोई भी फिशिंग हमला रिपोर्ट नहीं किया गया। आईबीए-बैंकिंग टेक्नॉलॉजी द्वारा “सर्वश्रेष्ठ वित्तीय समावेशन पहल” का अवार्ड प्राप्त।